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मोबाइल के बाद चश्मे की बारी; Google अब Android XR से आंखों के सामने स्क्रीन लाने की तैयारी में

Google Android-XR

पिछले दो दशक में यदि किसी एक टेक्निक ने दुनिया की रोजमर्रा की जिंदगी को सबसे ज्यादा बदला है तो वह एंड्रॉयड है। आपको अच्छे से पता है कि मोबाइल फोन से शुरू हुआ यह सफर अब टीवी, घड़ी और कार तक पहुंच गया है। आज दुनिया भर में करीब 350 करोड़ डिवाइस किसी न किसी रूप में एंड्रॉयड पर चल रहे हैं।
इसी कड़ी में अब Google एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। दरअसल, Google ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है, जिसमें स्क्रीन मोबाइल या लैपटॉप पर नहीं, बल्कि चश्मे के भीतर आंखों के सामने दिखाई देगी। जी हां, इसके लिए गूगल ने नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसे नाम दिया गया है Android XR. यही प्लेटफॉर्म आने वाले समय में स्मार्ट ग्लास और XR हेडसेट्स की दुनिया को नई दिशा देगा। Google की योजना है कि 2026 तक अपने पहले AI-पावर्ड स्मार्ट चश्मे बाजार में उतारे जाएं।

VR, AR और XR: क्या है फर्क, आसानी से समझिए

आज तकनीक की दुनिया में VR, AR और XR जैसे शब्द तेजी से सुनाई दे रहे हैं। इनमें फर्क समझना जरूरी है।

  • VR यानी वर्चुअल रियलिटी
    VR पूरी तरह ढके हुए हेडसेट होते हैं। इन्हें पहनने के बाद बाहर की दुनिया नजर नहीं आती। यूजर एक डिजिटल दुनिया में चला जाता है। ये गेमिंग और मूवी देखने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, पर इन्हें ज्यादा देर तक नहीं पहना जा सकता है।
  • AR यानी ऑगमेंटेड रियलिटी
    AR हल्के स्मार्ट चश्मे होते हैं। इनमें बाहर की दुनिया साफ दिखती है और उसी पर डिजिटल जानकारी जुड़ जाती है। जैसे मैप, नोटिफिकेशन या AI से जुड़ी जानकारी। मेटा के स्मार्ट ग्लास इसी कैटेगरी का उदाहरण हैं।
  • XR यानी एक्सटेंडेड रियलिटी
    XR, VR और AR का मिला-जुला रूप है। इनमें ट्रांसपैरेंट लेंस होते हैं, जिन पर 50 से 150 इंच तक की वर्चुअल स्क्रीन दिखाई दे सकती है। काम करना, फिल्म देखना, गेम खेलना…ये सब कुछ एक चश्मे के अंदर संभव हो जाता है।

सैमसंग ने दिखाया रास्ता, Google बना रहा सिस्टम

XR कैटेगरी में पहला बड़ा प्रोडक्ट सैमसंग ने लॉन्च किया है। Samsung Galaxy XR नाम का यह हेडसेट अमेरिका में लॉन्च हो चुका है। इसकी कीमत वहां अभी करीब 1.63 लाख रुपए रखी गई है। यह देखने में VR जैसा ही है, पर इसमें लगे कैमरे बाहर की दुनिया को साफ दिखाते हैं। हालांकि भारत में अभी यह नहीं मिल रहा है।
इस डिवाइस में यूजर को ऐसा अनुभव मिलता है, जैसे उसके सामने 150 इंच की स्क्रीन हो। ऑफिस का काम, वीडियो कॉल, फिल्में और गेमिंग सब कुछ इसी वर्चुअल स्क्रीन पर किया जा सकता है।

ऐसी है Google की तैयारी

आज XR की दुनिया में सबसे बड़ी समस्या यह है कि हर कंपनी अपना अलग सॉफ्टवेयर बनाती है। एक ब्रांड का अनुभव दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। Google इसे बदलना चाहता है। Android XR के जरिए Google वही करना चाहता है, जो उसने मोबाइल की दुनिया में किया था। यानी वह एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है, जहां हर ब्रांड पर अनुभव लगभग एक जैसा और आसान हो।
Android XR आने से डेवलपर्स वही ऐप्स XR के लिए भी बना सकेंगे, जो आज स्मार्टफोन पर चलते हैं। गेम, ओटीटी ऐप्स, क्लाउड गेमिंग और वर्क टूल्स सीधे चश्मे में आ जाएंगे।

किस तरह के स्मार्ट ग्लास पर हो रहा है काम

Google और उसकी पार्टनर कंपनियां अलग-अलग तरह के XR ग्लास पर काम कर रही हैं।

  1. ऑडियो-ओनली ग्लासेस
    इनमें स्क्रीन नहीं होगी। माइक्रोफोन और स्पीकर के जरिए आप सीधे Google Gemini AI से बात कर सकेंगे। कुछ मॉडल में कैमरा होगा, जिससे सामने दिख रही चीजों पर सवाल पूछे जा सकेंगे।
  2. मोनोकुलर ग्लासेस
    इनमें एक आंख के सामने छोटा डिस्प्ले होगा। नोटिफिकेशन, मैसेज, नेविगेशन जैसी हल्की जानकारी दिखेगी। डॉक्टर, इंडस्ट्रियल वर्कर और एथलीट्स के लिए यह काफी उपयोगी हो सकते हैं।
  3. बाइनोकुलर ग्लासेस
    दोनों आंखों के सामने डिस्प्ले होगा। ये टेलीप्रॉम्प्टर की तरह काम कर सकते हैं। प्रेजेंटेशन और पब्लिक स्पीकिंग में ये खास रोल निभा सकते हैं।
  4. फुल इमर्सिव XR हेडसेट
    इनमें पूरी वर्चुअल दुनिया नजर आएगी। करीब 100 इंच या उससे बड़ी स्क्रीन सिर्फ आपकी आंखों के सामने होगी। यह एक चलता-फिरता मल्टी-स्क्रीन ऑफिस बन सकता है। Apple Vision Pro और Samsung Galaxy XR इसी कैटेगरी में आते हैं।

2026 तक तेजी से बढ़ेगा XR बाजार

मार्केट रिसर्च एजेंसी IDC के मुताबिक, 2026 तक XR डिवाइस की बिक्री 1.45 करोड़ यूनिट को पार कर जाएगी। Android XR के साथ सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्मार्टफोन पर चलने वाले कई ऐप्स सीधे XR पर भी चल सकेंगे। इसका मतलब है कि यूजर को नई दुनिया सीखने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

मोबाइल ने जेब बदली, XR आंखें बदलने आ रहा

एक समय कंप्यूटर भारी मशीन हुआ करता था। फिर मोबाइल ने उसे जेब में ला दिया। अब XR तकनीक उसी डिजिटल दुनिया को सीधे आंखों के सामने लाने की तैयारी कर चुकी है। Google आने वाले दशक की दिशा साफ कर चुका है। भविष्य में स्क्रीन हाथ में नहीं, चश्मे में होगी और डिजिटल दुनिया देखने के लिए आंखें नीचे नहीं, सीधे सामने रहेंगी।