मध्यप्रदेश को 17 जनवरी 2026 को 8 नेशनल हाईवे की सौगात मिलेगी। विदिशा में मुख्य कार्यक्रम होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) मध्यप्रदेश को यह सौगात देंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होंगे।
इस मेगा इवेंट में केंद्रीय मंत्री गडकरी करीब 4 हजार 400 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले आठ National Highway Projects का शिलान्यास एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने बताया कि 181 किलोमीटर लंबी ये सड़क परियोजनाएं मध्य भारत और बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूती देंगी। कार्यक्रम को रोड सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए तीन एडवांस ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की भी नींव रखी जाएगी। यहां युवाओं को सेफ ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे हादसे कम होंगे।
कहां-कहां मिलेगा फायदा
इन सड़कों के बन जाने से भोपाल, विदिशा, सागर, राहतगढ़, ब्यावरा जैसे शहरों तक जाने वाले रास्तों पर ट्रैफिक आसान होगा। चार लेन चौड़ी सड़कों से यात्रा समय घटेगा। ट्रैफिक जाम कम होगा। सड़क हादसों में कमी आएगी। आपको बता दें कि प्रदूषण और ईंधन खर्च घटेगा। कई जगहों पर ब्लैक स्पॉट सुधारे गए हैं, अंडरपास बनाए गए हैं और सड़क के मोड़ों को सुरक्षित किया गया है।
Nitin Gadkari इन प्रोजेक्ट्स का करेंगे शुभारंभ
1. अब्दुल्लागंज-इटारसी खंड
फोर लेन सड़क चौड़ीकरण लंबाई 12 किलोमीटर, लागत 418 करोड़ रुपए
यह प्रोजेक्ट ओबेदुल्लागंज-इटारसी-बैतूल कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बैतूल से नागपुर तक बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करता है। पहले यह खंड दो-लेन का होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रमुख बॉटलनेक बना हुआ था, जिससे जाम की स्थिति बनती थी। फोन लेन चौड़ीकरण के बाद ट्रैफिक आसान होगा। 15 से 30 मिनट तक का समय बचेगा। परियोजना के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एनिमल अंडरपास एवं साउंड-प्रूफ कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जिससे टाइगर सहित अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी।
देहगांव-बम्होरी मार्ग का निर्माण कार्य
इस सड़क की लंबाई 27 किलोमीटर है। इसे 60 करोड़ रुपए से बनाया गया है। CRIF के अंतर्गत देहगांव से बम्होरी तक यह सड़क बनाई गई है। यह रोड रायसेन जिले को बाटेरा-सिलवानी–सागर मार्ग के माध्यम से सागर से जोड़ता है। परियोजना से किसानों को कृषि उत्पादों के सुरक्षित, तेज और सुगम परिवहन की सुविधा मिलेगी। मंडियों और बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
इन प्रोजेक्ट की रखी जाएगी आधारशिला
- विदिशा में फोरलेन सड़क का चौड़ीकरण
सबसे अहम परियोजना भोपाल से विदिशा के बीच 42 किलोमीटर लंबे फोरलेन चौड़ीकरण की है, जिस पर करीब 1 हजार 41 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह सड़क भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके फोरलेन बनने से भोपाल और विदिशा के बीच सफर आसान और तेज होगा। दूसरे जिलों और राज्यों की ओर जाने वाला भारी यातायात भी सुचारू रूप से चल सकेगा। - विदिशा से ग्यारसपुर की सड़क
विदिशा से ग्यारसपुर तक 29 किलोमीटर लंबे मार्ग को भी चार लेन में बदला जाएगा, जिस पर 543 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस रोड के चौड़ीकरण से विदिशा और आसपास के इलाकों में सफर का वक्त घटेगा और सड़क पहले से ज्यादा सुरक्षित बनेगी। किसानों के लिए यह सड़क खास तौर पर उपयोगी होगी, क्योंकि इससे गेहूं और अन्य कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। - ग्यारसपुर से राहतगढ़ तक रोड
ग्यारसपुर से राहतगढ़ के बीच 36 किलोमीटर लंबी सड़क को चार लेन करने का भी काम शुरू होगा, जिस पर 903 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस हिस्से के विकसित होने से क्षेत्रीय और लंबी दूरी के यातायात को मजबूती मिलेगी। यात्रा समय कम होगा, सड़क हादसों में कमी आएगी और माल ढुलाई तेज होगी, जिससे व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। - राहतगढ़ से बेरखेड़ी वाली रोड
राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक 10 किलोमीटर लंबे खंड को चार लेन करने के लिए 731 करोड़ की परियोजना भी शामिल है। इस सड़क के चौड़ीकरण से राष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय यातायात की क्षमता बढ़ेगी। ट्रैफिक सुचारू चलेगा और दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा, जिसका सीधा फायदा व्यापार और कृषि परिवहन को मिलेगा। - सागर वेस्टर्न बायपास का निर्माण
सागर शहर के लिए सागर वेस्टर्न बायपास का निर्माण भी बेहद अहम माना जा रहा है। 20.2 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड फोरलेन बायपास पर 688 करोड़ खर्च होंगे। इसके बनने से एनएच-146 सीधे एनएच-44 से जुड़ जाएगा। सागर शहर के भीतर से गुजरने वाला भारी ट्रैफिक बाहर निकल जाएगा। इससे शहर में जाम की मुसीबत कम होगी। - भोपाल-ब्यावरा सड़क पर अंडरपास
भोपाल से ब्यावरा मार्ग पर पांच अंडरपास बनाए जाएंगे, जिन पर 122 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह काम ब्लैक स्पॉट सुधार के तहत किया जा रहा है, ताकि सड़क हादसों को कम किया जा सके। अंडरपास बनने से हाईवे और आसपास के स्थानीय रास्तों के बीच आवागमन सुरक्षित होगा। ग्रामीण व शहरी इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।









