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Delhi Metro का होगा विस्तार, केंद्र ने फेज 5-ए को दी मंजूरी, 16 किलोमीटर में बनेंगे 13 नए स्टेशन

भारत में शहरी परिवहन का चेहरा तेजी से बदल रहा है। सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक, प्रदूषण और समय की बर्बादी से राहत दिलाने के लिए मेट्रो अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। वर्ष 2025 भारत के मेट्रो सफर में एक अहम साल बनकर उभरा है। इसी साल इंदौर और भोपाल जैसे मध्यप्रदेश के शहरों में मेट्रो की शुरुआत हुई और अब दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) के बड़े विस्तार को भी हरी झंडी मिल गई है।
बुधवार, 24 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Delhi Metro के प्रोजेक्ट 5-ए के विस्तार को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 12 हजार 015 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह नया चरण लगभग 16 किलोमीटर लंबा होगा। इसके तहत तीन नए रूट बनाए जाएंगे। कुल 13 नए स्टेशन जोड़े जाएंगे। खास बात यह है कि इनमें से 10 स्टेशन अंडर ग्राउंड होंगे। यानी दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों के नीचे एक और मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार होगा।
केंद्रीय रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल दिल्ली मेट्रो की 12 लाइनें पूरी तरह चालू हैं। इनके अलावा छह नई परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है, जिनका मकसद मौजूदा लाइनों को और आगे तक बढ़ाना है।

फिर 400 किलोमीटर हो जाएगा नेटवर्क

उन्होंने कहा कि फेज 5-ए के पूरा होते ही दिल्ली मेट्रो का कुल नेटवर्क 400 किलोमीटर से ज्यादा का हो जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो दुनिया की टॉप पांच मेट्रो प्रणालियों में शामिल हो जाएगी। हर दिन करीब 65 लाख यात्री इस नेटवर्क से सफर कर सकेंगे।
दिल्ली मेट्रो के इस नए प्रोजेक्ट में तीन अहम कॉरिडोर शामिल किए गए हैं। पहला रूट रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक होगा। दूसरा रूट एयरोसिटी से एयरपोर्ट टर्मिनल-1 को जोड़ेगा। तीसरा रूट तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक जाएगा। ये तीनों रूट दिल्ली और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देंगे।

Delhi Metro में यात्रियों को मिलेगा फायदा

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक का विस्तार खास तौर पर नोएडा और फरीदाबाद से आने वाले यात्रियों के लिए फायदेमंद होगा। इससे इन इलाकों से गुरुग्राम तक सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिल सकेगी। रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों का काफी समय बचेगा और लंबी यात्राओं का तनाव कम होगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आएगा।

कर्तव्य भवन तक बेहतर कनेक्टिविटी

इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कर्तव्य भवन की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। पड़ोसी राज्यों से दिल्ली में काम करने आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को आवागमन में आसानी होगी। नया मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटाने में मदद करेगा। निजी वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा।
रामकृष्ण आश्रम मार्ग कॉरिडोर को लेकर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह एयरपोर्ट लाइन को सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशन से जोड़ेगा। इसके बाद यह ब्लू लाइन के इंद्रप्रस्थ स्टेशन तक पहुंचेगा। इसका मतलब यह है कि एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों को शहर के कई हिस्सों तक और आसान रास्ता मिल जाएगा।

देश में मेट्रो का बढ़ता दायरा

दिल्ली के साथ-साथ देश के दूसरे शहरों में भी मेट्रो का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में भोपाल मेट्रो की शुरुआत हुई है। भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है, जहां मेट्रो ट्रेन दौड़ रही है। इससे पहले इंदौर में भी मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। यह दिखाता है कि मेट्रो अब सिर्फ महानगरों की जरूरत नहीं, बल्कि मध्यम शहरों के विकास का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।

कोलकाता में हुई थी शुरुआत

First metro Kolkata

भारत में मेट्रो रेल की कहानी महज ट्रांसपोर्ट सुविधा तक सीमित नहीं है। यह तकनीक, सुरक्षा, आराम और शहरों की नई पहचान की कहानी है। इसकी शुरुआत 1984 में कोलकाता से हुई थी। कोलकाता मेट्रो देश की पहली मेट्रो थी, जिसका 3.4 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह अंडरग्राउंड बनाया गया था। इसे तैयार करने में करीब 12 साल लगे थे और बिजली की सप्लाई थर्ड रेल सिस्टम से होती थी।

2002 में दिल्ली पहुंची मेट्रो

इसके बाद 2002 में दिल्ली मेट्रो ने देश को एक नया अनुभव दिया। यह मेट्रो आधुनिक सुविधाओं का प्रतीक बनी। एसी कोच, स्मार्ट कार्ड, बेहतर स्टेशन डिजाइन और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ने मेट्रो को आम लोगों की पहली पसंद बना दिया। दिल्ली मेट्रो का मॉडल बाद में देश के कई शहरों ने अपनाया।
फिर 2011 में बेंगलुरु, 2014 में मुंबई, 2015 में जयपुर और चेन्नई, 2017 में कोच्चि, लखनऊ और हैदराबाद, 2019 में नागपुर, नोएडा और गुजरात, 2021 में कानपुर, 2022 में पुणे और 2024-25 में आगरा, इंदौर, पटना और भोपाल तक मेट्रो का विस्तार हुआ। आज मेट्रो नेटवर्क 12 राज्यों के 26 शहरों तक पहुंच चुका है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मेट्रो भारत के शहरों को तेज, साफ और सुविधाजनक भविष्य की ओर ले जा रही है। दिल्ली मेट्रो का नया विस्तार इसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।